2.50 लाख रुपये से अधिक यूलिप में लगेगा टैक्स: उच्च आय वाले को मिलता था कम आय वालो का लाभ
हर साल आप टैक्स बचाने के लिए म्यूचुअल फंड, बीमा, यूलिप जैसे कई विकल्प में निवेश करते है। अगर आप टैक्स फ्री कमाई के लिए यूलिप खरीदने की योजना बना रहे।
तो अब आपको सावधान रहना होगा, क्योंकि 2.50 लाख रुपये से अधिक यूलिप में निवेश पर सरकार ने टैक्स लगाने का निर्णय लिया और इस बारे में नियम और शर्तो को स्पष्ट किया।
एक अधिसूचना केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने जारी की, जिसमें यूलिप की कर छूट की स्थिति का पता लगाने की कार्यप्रणाली के बारे में बताया गया है।
वार्षिक प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से अधिक होने पर बजट 2021 में यूलिप की आय पर कर-मुक्त स्थिति को हटाने का प्रस्ताव किया गया।
ढांचा कैसे काम करेगा, विशेष रूप से कई यूलिप के मामले में जिसमे बजट प्रस्तावों से पहले लिए गए और उसके बाद खरीदे गए दोनों प्रकार के बारे में बहुत-सी अस्पष्टताएँ थीं।
1 फरवरी, 2021 से पहले खरीदे गए पुराने यूलिप को पूरी तरह से छूट माना जाता था, पर इसका ये मतलब नहीं कि नए यूलिप आप 2.5 लाख रुपए तक के प्रीमियम के साथ खरीद, टैक्स छूट का फायदा उठाये।
नवीनतम सीबीडीटी अधिसूचना में कहा कि नए और पुराने दोनों यूलिप के कुल प्रीमियम पर छूट के लिए विचार किया जायगा और अगर राशि 2.5 लाख रुपये से अधिक है तो यह छूट 2.5 लाख रुपये से अधिक के नए यूलिप के लिए उपलब्ध नहीं होगी।
अधिसूचना के अनुसार पॉलिसीधारक को मिले बोनस और निकासी को कैपिटल गेन्स माना जायगा। जिस आधार पर उसपर टैक्स की गणना होगी।
बाजार से यूलिप शेयर जुड़ा है, जिस वजह से 1 साल से पहले राशि निकलने पर 15 फीसदी की दर से छोटी अवधि का कैपिटल गेन्स कर लगेगा। 10 फीसदी की दर से लंबी अवधि का कैपिटल्स गेन्स एक साल के बाद निवेश निकलने पर कर लगेगा।
सरकार ने बजट 2021 में कहा था कि छोटे निवेशकों को मिलने वाले लाभ का फायदा उच्च आय वाले उठाते है। जबकि छोटी बचत पर टैक्स छूट का मकसद कम आय वाले निवेशकों को लाभ पहुंचना है।
इसलिए सरकार ने यूलिप में 2.50 लाख रुपये से अधिक के निवेश पर टैक्स लेने का फैसला किया है। ताकि उच्च आय वाले ज्यादा लाभ न उठा सके।
हेमलता बिष्ट
Sandhya Halchal News